बिहार में कृषि-प्रौद्योगिकी और हरित ऊर्जा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
आज, 12 अगस्त 2025 को बिहार से कई महत्वपूर्ण कृषि और पर्यावरण से जुड़ी खबरें सामने आईं जिन्होंने राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और विकास के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोला। इनमें बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU) की सफलता, बायोफ्यूल नीति का विस्तारित दृष्टिकोण, और एआई आधारित कृषि समाधान पर जोर शामिल है। ये सामूहिक पहलें राज्य को कृषि नवाचार और किसान सशक्तिकरण के क्षेत्र में अग्रणी बनाने का सपना संजोती हैं।
1. BAU को राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया
भागलपुर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU) को राष्ट्रीय स्तर पर चार प्रमुख नवाचार पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्होंने ‘क्लाइमेट-रिजिलियंट एग्रीकल्चर प्रोग्राम’ (CRAP) के लिए ‘Regenerative Agriculture Award’ जीता, जिसने 18 जिलों में 45,000 से अधिक किसानों को लाभान्वित किया। इसके अलावा ‘Excellence in Water Management Award’, ‘Organic Farming Excellence Award’ और ‘Waste Management Innovation Award’ से विश्वविद्यालय की सतत खेती और जल प्रबंधन की सेवाओं को राष्ट्रीय मान्यता मिली The Times of India।
यह मान्यता BAU की वैज्ञानिक पहल और कृषि में टिकाऊ तकनीकों को अपनाने वाली मानसिकता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। विश्वविद्यालय ने मिट्टी से लेकर फसल अवशेष प्रबंधन तक, आधुनिक तकनीकों को धरातल पर उतारने में कड़ी मेहनत की है।
2. बायोफ्यूल नीति में नए विस्तार
विश्व बायोफ्यूल दिवस के अवसर पर बिहार सरकार ने ‘बायोफ्यूल प्रोडक्शन प्रमोशन (अमेंडेड) पॉलिसी 2025’ का शुभारंभ किया। इस नीति का उद्देश्य जट्रोफा (Ratan jot), मकई और गन्ने से बायोएथेनॉल और CBG (Compressed Biogas) का उत्पादन बढ़ाना है। वर्तमान में राज्य में 12 ईथेनॉल संयंत्र काम कर रहे हैं, जो 5.65 अरब लीटर ईथेनॉल उत्पादन करते हैं, जिनका 60% दक्षिण भारत को निर्यात होता है। भविष्य में नौ नए संयंत्रों की स्थापना की योजना है The Times of India।
इसके साथ ही, ‘Bihar Biofuel Dialogues 2025’ में ऊर्जा मंत्री नितीश मिश्रा ने बताया कि यह नीति नवोन्मेष, निवेश और किसानों के लिए अवसर लेकर आएगी, जिससे बिहार को एक अग्रणी बायोफ्यूल राज्य बनाया जा सकेगा The Times of India।
3. एआई-से संबंधित कृषि नवाचारों की दिशा में कदम
राजभवन, पटना में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में राज्य के गवर्नर (और विश्वविद्यालयों के चांसलर) अरिफ मोहम्मद खान ने BAU और CDAC को कृषि में Agricultural Informatics और AI का अधिकतम उपयोग करने की दिशा में निर्देश दिया। बैठक में BAU के उपकुलपति D. R. सिंह और CDAC के वैज्ञानिक उपस्थित थे, जिन्होंने कृषि को परिशुद्ध (precision) और टिकाऊ बनाने वाले एआई परियोजनाओं की प्रस्तुति दी। गवर्नर ने इन पहलों के विस्तार, क्षेत्रीय परीक्षण और किसान क्षमता निर्माण की त्वरित कार्यान्वयन पर विशेष ज़ोर दिया The Times of India।
यह पहल बिहार को “Agri-tech Leader” बनाकर, किसान समुदाय तक तकनीकी लाभ पहुँचाने के दृष्टिकोण को मूर्त रूप देने में सक्षम है।

