बिहार की सियासत: 8 जुलाई 2025 तक की ताज़ा राजनीतिक खबरें

बिहार की राजनीति हमेशा से भारत के सियासी परिदृश्य में चर्चा का विषय रही है। जातिगत समीकरण, सामाजिक न्याय, और विकास के मुद्दों पर आधारित इस राज्य की सियासत में हर दिन नए मोड़ देखने को मिलते हैं। जैसे-जैसे 2025 के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, बिहार में सियासी हलचल तेज हो गई है। यह लेख 8 जुलाई 2025 तक की ताजा राजनीतिक खबरों, प्रमुख दलों की रणनीतियों, और हाल के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों पर एक विस्तृत और प्रामाणिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यह सामग्री आपके वेबसाइट के पाठकों के लिए आकर्षक और विश्वसनीय होगी, जो बिहार की सियासत को समझने में रुचि रखते हैं।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025: पृष्ठभूमि और माहौल

बिहार विधानसभा का कार्यकाल नवंबर 2025 में समाप्त होने वाला है, और इसके पहले 243 सीटों के लिए चुनाव होने हैं। सरकार बनाने के लिए किसी भी दल या गठबंधन को कम से कम 122 सीटों की आवश्यकता होगी। बिहार की सियासत में जातिगत समीकरण और सामाजिक न्याय के मुद्दे हमेशा से केंद्रीय रहे हैं, और इस बार भी ये मुद्दे प्रमुखता से उभर रहे हैं। इसके साथ ही, हाल के घटनाक्रमों जैसे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और अपराध की घटनाओं ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है।

मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) पर विवाद

बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। भारत निर्वाचन आयोग ने 24 जून 2025 से शुरू हुए इस अभियान के तहत लगभग 2.93 करोड़ मतदाताओं से अपने और अपने माता-पिता (1987 के बाद जन्मे लोगों के लिए) के जन्म तिथि और स्थान से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है। इस प्रक्रिया की समयसीमा और कार्यप्रणाली पर विपक्षी दलों, विशेषकर इंडिया गठबंधन, ने तीखा विरोध जताया है।

विपक्ष का आरोप है कि यह अभियान “वोटर दमन” का एक सुनियोजित प्रयास है, जो विशेष रूप से मुस्लिम, दलित, और प्रवासी गरीब समुदायों को निशाना बना रहा है। कांग्रेस के महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने इसे “लोकतंत्र के खिलाफ साजिश” करार देते हुए कहा, “यह मतदाता सूची नहीं, बल्कि सियासी मकसद से लिखा गया एक स्क्रिप्ट है।” सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर 10 जुलाई 2025 को सुनवाई करने का फैसला लिया है, जिससे यह मुद्दा और भी चर्चा में आ गया है।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इस अभियान का बचाव करते हुए कहा कि सभी दलों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया गया था और मतदाता सूची की स्थिति पर कोई भी दल संतुष्ट नहीं था। हालांकि, विपक्षी नेताओं का कहना है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और यह चुनाव से ठीक पहले शुरू की गई है, जो संदेह पैदा करता है।

इंडिया गठबंधन की रणनीति

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन ने सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को कड़ी चुनौती देने की रणनीति बनाई है। गठबंधन ने दोहरी रणनीति अपनाई है: सामाजिक न्याय का मुद्दा और बिहारी अस्मिता का नारा। विपक्ष का दावा है कि केंद्र सरकार का हस्तक्षेप और बिहार में “दिल्ली का प्रॉक्सी शासन” स्थानीय लोगों के हितों को नुकसान पहुंचा रहा है। इसके अलावा, गठबंधन ने 9 जुलाई 2025 से एक संयुक्त “चक्का जाम” अभियान शुरू करने की घोषणा की है, जिसमें सामाजिक न्याय, कल्याणकारी योजनाओं, और मतदाता सूची विवाद पर जोर दिया जाएगा।

इस गठबंधन में आरजेडी, कांग्रेस, और वामपंथी दलों के अलावा असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईවैसी ने भी महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई है। तेजस्वी यादव ने दावा किया है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस, जो हाल ही में एनडीए से अलग हुए हैं ।

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